Sunday, September 11, 2011

गुजारिश

भ्रष्टाचार की लड़ाई की शुरुवात आज से कई साल पहले श्री लाल बहादुर  शास्त्री द्वारा की  गई । उसके बाद  कई नेताओं द्वारा यह मुद्दा उठाया गया , परंतु सभी असफल रहे । कई बार नेताओं ने असफल प्रयास किए किन्तु जनसमर्थन के अभाव मे मुद्दा वही का वही रह गया । 1947 मे आजादी मिलने के बाद जनता आराम करने लगी अपनी थकान मिटाने लगी , और यह आराम काफी लंबा हो गया , जनता सोती रह गई लूटने वाले फिर आ गए । अबकी बार लूटने वाले हमारे अपने ही थे । अपनो    ने ऐसा लूटा कि जनता समझ ही नहीं पाई बस लूटती रह गई ।
 
एक दिन एक मशाल जली , एक हाथ उठा , एक व्यक्ति दिखा नाम अन्ना हज़ारे था । अन्ना जी  की हुंकार ऐसी लगी कि जनता जाग उठी । एक हाथ के साथ करोड़ो हाथ जुड़ गए , करोड़ो मशाले जल गई । अब जागने की बारी सरकार की थी । जागी हुई जनता ने सत्तारूढ़ नेताओ की नींद उड़ा दी ।  अब देखना यह है कि जीत कहाँ तक मिली है । जनता से गुजारिश है कि वह जागी रहे और अब अपना हक ले कर ही दम ले अन्यथा सत्तारूढ़ लोग क्या पता कब उठी हुई आवाज को दबा दे , जलती हुई मशाल को बुझा दे । इसलिए अब जागे हो जागे ही रहना सदा मशाल जलाए ही रहना 
अपने हक से कोई समझौता नहीं करना । सरकार ध्यान दूसरी तरफ मोड़ने का काम जरूर करेगी ।
अभी बहुत लड़ाई लडनी है । भ्रष्टाचार मुक्त राष्ट्र बने यही संकल्प ले हम हमेशा अपने पथ पर चलते रहे । 

1 comment:

"पलाश" said...

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